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शिष्टाचार

 🙏  शिष्टाचार का मह्त्व 🙏

🔶"शिष्टाचार" का अर्थ है सभ्य व्यवहार, अच्छे संस्कार, या आदर-सत्कार।

🔶शिष्टाचार के मुख्य सिद्धांत सम्मान, विचार और ईमानदारी हैं। सम्मान का अर्थ है किसी और के गुणों और सीमाओं को स्वीकार करना, विचार में उनकी ज़रूरतों और अधिकारों को समझना शामिल है, और ईमानदारी एवंम  निष्ठा के साथ काम करना है। ये तीन गुण सांस्कृतिक संदर्भ के आधार पर शिष्टाचार के विभिन्न सामान्य उदाहरणों को आकार देते हैं, जैसे झुकना या हाथ मिलाना।

🔶शिष्टाचार जीवन का दर्पण है जिसमें हमारे व्यक्तित्व का स्वरूप दिखाई देता है। शिष्टाचार के माध्यम से ही मनुष्य का प्रथम परिचय समाज से होता है। अच्छा या बुरा, दूसरों पर कैसा प्रभाव पड़ता है यह हमारे उस व्यवहार पर निर्भर करता है जो हम दूसरों से करते हैं। शिष्ट व्यवहार का दूसरों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है, दूसरों को सद्भावना आत्मीयता और सहयोग की प्राप्ति होती है। साथ ही समाज में लोकप्रियता बढ़ती है। इसके विपरीत अशिष्ट व्यवहार दूसरों में घृणा, द्वेष, पैदा कर देता है।

🔶✏️ अकृत्यं नैव कर्तव्यं प्राण त्यागेऽप्यु परिस्थते।
          न च कृत्यं परित्याज्यमेष धर्मः सनातनः।
अर्थात्  - चाहे मृत्यु सामने आ जाए, अकृत्य कभी न करें और मृत्यु का सामना करते हुये भी सत्कार्य करते रहना चाहिये, यही सनातन धर्म है।

🔶 ✏️धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षतिः।
         तस्माद्धर्मो त हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीन॥
अर्थात् - धर्म का निरादर करने वाला स्वयं नष्ट हो जाता है और धर्म की रक्षा करने वाले की धर्म स्वयं रक्षा करता है। इसीलिए धर्म का कभी त्याग न करके धर्माचरण करते रहना चाहिये।

🔶 अच्छे आचरण को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:-

🔶स्कूल में अच्छे शिष्टाचार

स्कूल में बच्चे को अपने शिक्षकों और वरिष्ठों का सम्मान करना चाहिए। इसके अलावा, उसे शिक्षक की बात भी सुननी चाहिए क्योंकि वे उसके मार्गदर्शक हैं। इसके अलावा, बच्चे को अच्छे कपड़े पहनने चाहिए और साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।

इसके अलावा, स्वच्छता बनाए रखने के लिए बच्चे को हमेशा रूमाल रखना चाहिए । बच्चे को हमेशा समय का पाबंद होना चाहिए। ताकि वह दूसरों का समय बर्बाद न करे। साथ ही, आपको कभी भी दूसरों की चीज़ें बिना अनुमति के नहीं लेनी चाहिए।
चूँकि स्कूल में बहुत सारे बच्चे पढ़ते हैं, इसलिए आपको कतार में खड़े होकर एक-दूसरे को धक्का नहीं देना चाहिए।

🔶घर पर अच्छे शिष्टाचार

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको घर पर अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। दिन की शुरुआत और अंत में हमेशा उन्हें “सुप्रभात्” और “शुभ् रात्रि”  या "नमस्ते"  कहें। इसके अलावा, आपको अपने दाँतों को ब्रश करना चाहिए और रोज़ाना नहाना चाहिए। ताकि आप उचित स्वच्छता बनाए रख सकें।

खाना खाने से पहले हाथ धोएँ, खाना अच्छी तरह चबाएँ और मुँह बंद करके खाएँ। साथ ही घर से बाहर निकलने से पहले माता-पिता की अनुमति अवश्य लें। सबसे बढ़कर, आप अपनी बातचीत में 'धन्यवाद' और 'कृपया' शब्दों का प्रयोग करें। काम के दौरान बड़ों के प्रति अच्छे व्यवहार का पालन करें। साथ ही, आपको अपना काम समय पर पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।

 🔶इसके अलावा,आपको अपने सहकर्मियों का सम्मान करना चाहिए। आपको कार्यालय में समय का पाबंद होना चाहिए। काम करते समय गपशप न करें और दूसरों का ध्यान भंग न करें।आपको दूसरों के काम में दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए और अगर उन्हें कोई परेशानी है तो उनकी मदद करें। अंत में, भ्रष्टाचार में न पड़ें और अपना काम ईमानदारी और लगन से करें।🙏

 अवनी अशवार 

राधिका एजुकेयर स्कूल, जामनगर ।

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